Sun. May 22nd, 2022

आरबीआई की तरफ से रिटेल डायरेक्ट स्कीम के जरिए खुदरा निवेशकों को सरकारी भवन में सीधे निवेश करने की सुविधा देने से बैंकों की चिंता बढ़ गई है

माना जा रहा है कि इससे बैंकों की जमा में कमी आ सकती है इसके दो बड़े कारण हैं

एक तो बैंकों में डिपॉजिट रेट अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर है दूसरी तरफ बैंकों में सरकारी गारंटी सिर्फ ₹500000 तक है जबकि सरकारी वार्ड में जमा पूरी रकम की गारंटी सरकार लेती है यानी सरकार बाढ़ में पैसे डूबने का खतरा नहीं होता है यही कारण है कि 12 नवंबर को आरबीआई का रिटर्न लाइट पोर्टल खुलने के बाद से अब तक बैंक निफ्टी में 7 फ़ीसदी की गिरावट आ चुकी है

हालांकि दूसरे shares भी गिरे हैं लेकिन बैंकिंग से ज्यादा दबाव में है

आईसीआईसीआई एचडीएफसी जैसे बड़े प्राइवेट बैंकों के अलावा एसबीआई जैसे देश के सबसे बड़े सरकारी बैंकों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली है बैंक में पैसा जमा करवाने वाले अनिवासी भारतीय भी बड़ी संख्या में सीधे सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने की विकल्प की ओर आकर्षित हो रहे हैं यदि बैंक इस प्रतिस्पर्धा में शामिल होते हैं तो उनका प्रॉफिट मार्जिन घट सकता है

By shrinnn

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